हरिद्वार। लक्सर क्षेत्र के फुलगढ़ के जंगलों में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए सनसनीखेज गैंगरेप और उसके साथी के साथ मारपीट के मामले को पथरी पुलिस ने महज़ कुछ ही दिनों के भीतर सुलझा लिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नवनीत के कड़े और स्पष्ट निर्देशों के बाद पुलिस की ताबड़तोड़ दबिशों के आगे आखिरकार आरोपियों को घुटने टेकने पड़े। पुलिस ने इस घिनौने अपराध में संलिप्त सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है।
घटनाक्रम के अनुसार, बीते 12 जुलाई की रात को तीन लड़के एक मोटरसाइकिल पर एक लड़की को लेकर फुलगढ़ के जंगल की तरफ आए थे। वे लड़की और एक अन्य लड़के को वहां छोड़कर वापस सुल्तानपुर लौट गए। उसी समय जंगल के पास पहले से ही तीन युवक बैठकर शराब पी रहे थे। सुनसान जगह पर लड़के-लड़की को अकेला देख शराबियों की नीयत डोल गई। उन्होंने तुरंत फोन कर अपने तीन अन्य साथियों को भी मौके पर बुला लिया। इसके बाद छहों आरोपियों ने लड़के और लड़की का पीछा करना शुरू कर दिया।
जंगल के भीतर पहुंचते ही आरोपियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। 4 आरोपियों ने लड़के को दबोच लिया और उसकी बेरहमी से पिटाई की, ताकि वह विरोध न कर सके। वहीं, 2 अन्य आरोपी नाबालिग लड़की को खींचकर जंगल के और गहरे हिस्से में ले गए। वहां मुख्य आरोपी महेश उर्फ मंत्री ने लड़की के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद आरोपी पीड़िता को बेसूध हालत में छोड़कर फरार हो गए। 13 जुलाई को जब पीड़िता के परिजनों ने थाना पथरी में तहरीर दी, तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए SSP हरिद्वार ने खुद कड़ा संज्ञान लिया। उन्होंने थानाध्यक्ष पथरी को आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के सख्त निर्देश दिए। आखिरकार 17 जुलाई को पुलिस को कामयाबी हाथ लगी। मुखबिर की सटीक सूचना पर घेराबंदी करते हुए पुलिस टीमों ने फुलगढ़ के जंगल से ही सभी 6 आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पुलिसिया पूछताछ में सख्ती बरतने पर आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पकड़े गए सभी आरोपी ग्राम फुलगढ़, थाना पथरी के निवासी हैं, जिनके नाम मोहित कुमार, सुमित, आशु, शुभम, महेश उर्फ मंत्री और आकाश है।
इस अंधेरे केस का पर्दाफाश करने में थानाध्यक्ष रविन्द्र कुमार, वरिष्ठ उपनिरीक्षक उपेन्द्र सिंह, चौकी प्रभारी फेरूपुर विपिन कुमार, उपनिरीक्षक बबलू चौहान, महिला उपनिरीक्षक शाहिदा परवीन समेत हेड कांस्टेबल नारायण राणा, कांस्टेबल मुकेश चौहान, दीपक चौधरी, नारायण सिंह, राकेश नेगी और सीआईयू (CIU) रुड़की की टीम का सराहनीय योगदान रहा।
