हरिद्वार। बैरागी कैंप की झुग्गियों से तीन साल की मासूम राधिका को उठाकर ले जाने वाले अंतर्राज्यीय बच्चा चोर गिरोह का हरिद्वार पुलिस ने सिर्फ 72 घंटे में पर्दाफाश कर दिया। इस सनसनीखेज मामले में दो महिलाओं समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह के चंगुल से दो मासूम बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया गया। पुलिस ने दिन-रात एक कर सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले, डंप डेटा खंगाला और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। जैसे-जैसे सुराग जुड़ते गए, वैसे-वैसे बच्चा चोरी का यह संगठित नेटवर्क बेनकाब होता गया।
उक्त खुलासे की जानकारी पत्रकारों को देते हुए SSP नवनीत सिंह ने बताया कि पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश से घबराए गिरोह के सदस्य अपहृत बच्ची राधिका को दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर लावारिस छोड़कर फरार हो गए। सूचना मिलते ही हरिद्वार पुलिस दिल्ली पहुंची और मासूम को सकुशल बरामद कर उसकी मां की गोद में सौंप दिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह बच्चों को चुराकर निसंतान दंपतियों को 2 से 5 लाख रुपये तक में बेचता था। गिरोह में बच्चों की रेकी करने, चोरी करने, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने, ग्राहक तलाशने और फर्जी मां-बाप बनकर सौदा करने तक की जिम्मेदारियां बंटी हुई थीं। जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ। आरोपियों ने बताया कि 24 मई को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से करीब डेढ़ साल के कार्तिक नाम के बच्चे को चुराकर बदायूं में डेढ़ लाख रुपये में बेच दिया था। हरिद्वार पुलिस ने उसे भी सकुशल बरामद कर लिया। गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद आकिल और प्रीति शर्मा गिरोह के मुख्य सौदागर निकले। दोनों बच्चों की कीमत तय कर उन्हें अपना या अनाथ बताकर बेचने का काम करते थे। पुलिस ने अन्य आरोपियों नसीमा, जुल्फिकार धर्मेंद्र और शिवा को भी गिरफ्तार कर लिया है।
