हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस ने आईसीआईसीआई बैंक से जुड़े करीब 50 लाख रुपये की संदिग्ध ट्रांजैक्शन के सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश करते हुए एक महिला समेत तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसएसपी नवनीत सिंह के नेतृत्व में नगर कोतवाली पुलिस ने इस हाईटेक फ्रॉड का खुलासा करते हुए आरोपियों के कब्जे से 13 लाख रुपये नकद, 12 लाख रुपये की प्लॉट रजिस्ट्री, एक स्कूटी, फर्जी दस्तावेज और डेबिट कार्ड बरामद किए हैं।
मामले की शुरुआत आईसीआईसीआई बैंक के पुराना रानीपुर मोड़ शाखा प्रबंधक अपूर्व दुबे की शिकायत से हुई, जिसमें खाताधारक की जानकारी के बिना खाते से लगभग 50 लाख रुपये निकलने की बात सामने आई। जांच में पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों के आधार पर भगवानपुर और मंडावर क्षेत्र में दबिश देकर संगीता देवी, रीनू कुमार उर्फ सोनू और उपेंद्र कुमार सहगल को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह पहले बड़ी कंपनियों के खातों की जानकारी जुटाता था, फिर फोन बैंकिंग और फर्जी आधार कार्ड के जरिए खाताधारक के नाम से नया डेबिट कार्ड जारी करवा लेता था। इसी कार्ड से एटीएम से नकदी निकालने के साथ-साथ देहरादून, रुड़की और दिल्ली से लाखों रुपये की ज्वेलरी खरीदी गई। बाद में ज्वेलरी बेचकर उसी रकम से प्लॉट और स्कूटी भी खरीदी गई।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों की नजर कई बड़ी कंपनियों के खातों पर थी। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है। वहीं, गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। दो आरोपी पहले भी एटीएम फ्रॉड में जेल जा चुके हैं, जबकि मुख्य आरोपी सोनू वर्ष 2013 के चर्चित हत्या कांड में भी जेल काट चुका है।
SP सिटी अभय प्रताप सिंह ने बताया कि यह गिरोह लंबे समय से बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम देने की फिराक में था। अब पूरे नेटवर्क की परतें खोलने के लिए जांच तेज कर दी गई है।
