हरिद्वार। इंकलाबी मजदूर केन्द्र एवं संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा के पदाधिकारियों ने प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता आयोजित कर गुड़गांव, मानेसर, नोएडा और फरीदाबाद सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूर आंदोलनों के दौरान हुई गिरफ्तारियों का कड़ा विरोध जताया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मजदूर नेताओं को फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा जा रहा है और यह श्रमिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए इंकलाबी मजदूर केन्द्र के हरिद्वार प्रभारी पंकज कुमार ने कहा कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारें पिछले दस वर्षों से न्यूनतम वेतन में संशोधन नहीं कर रही हैं, जिससे मजदूरों का धैर्य टूट रहा है। बढ़ती महंगाई और रसोई गैस के दामों में लगातार वृद्धि ने मजदूरों की आर्थिक स्थिति को और भी खराब कर दिया है, जिसके चलते वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं।
संयुक्त मोर्चा के संयोजक गोविंद सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों के कारण मजदूर आंदोलनों को दबाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि मजदूर नेताओं पर लगे सभी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं और गिरफ्तार श्रमिकों को बिना शर्त रिहा किया जाए।
भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष राजकिशोर ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए श्रम कानूनों में बदलाव कर रही हैं, जिससे मजदूरों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं। वहीं, देव भूमि श्रमिक संगठन के सुरेश राम ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में मजदूरों की आवाज दबाई जा रही है।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो हरिद्वार में भी उग्र आंदोलन किया जाएगा और देशव्यापी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की जाएगी। प्रेस वार्ता में अवधेश कुमार कृष्ण मुरारी अनिल कुमार सुरेश राम और नीति उपस्थित थे।
