हरिद्वार। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं की हकीकत जानने के लिए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बुधवार को अचानक ज्वालापुर और कनखल के दो राजकीय प्राथमिक विद्यालयों का रुख कर लिया। डीएम के औचक निरीक्षण से स्कूलों में हड़कंप मच गया। उन्होंने कक्षाओं में पहुंचकर बच्चों से सीधे संवाद किया और पाठ्यक्रम से जुड़े सवाल पूछकर पढ़ाई का स्तर परखा। साथ ही बच्चों से मिड-डे मील के स्वाद और गुणवत्ता की भी जानकारी ली। जिलाधिकारी ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय संख्या-3, ज्वालापुर और राजकीय प्राथमिक विद्यालय संख्या-18, कनखल का निरीक्षण करते हुए शिक्षण व्यवस्था, मध्याह्न भोजन, स्वच्छता, शौचालय, पेयजल और विद्यालय परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्रत्येक शिक्षक की नैतिक जिम्मेदारी है। निरीक्षण के दौरान डीएम ने मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर भी सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुरूप स्वच्छ और पौष्टिक भोजन मिले तथा भोजन में हरी सब्जियों को भी शामिल किया जाए। स्कूल परिसर, कक्षाओं और शौचालयों की नियमित साफ-सफाई के निर्देश भी दिए गए। राजकीय प्राथमिक विद्यालय संख्या-3 की प्रधानाध्यापिका सरिता रानी चौधरी ने बताया कि विद्यालय में 334 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, जिनमें से 204 बच्चे बुधवार को उपस्थित रहे। विद्यालय में 12 शिक्षक कार्यरत हैं। वहीं, शिक्षक प्रमुद अहमद के 4 फरवरी 2025 से विद्यालय से अनुपस्थित रहने की जानकारी भी जिलाधिकारी को दी गई। डीएम ने शिक्षकों को अभिभावकों के साथ नियमित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों की उपस्थिति और शैक्षणिक प्रगति में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाई जा सके। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में सामने आ रही कमियों को प्राथमिकता से दूर कराया जाएगा। पुराने स्कूल भवनों की मरम्मत और रखरखाव के लिए सीएसआर के माध्यम से कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने दो टूक कहा कि जनपद में शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए औचक निरीक्षण और निगरानी का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
