गुुरुसत्ता के आदर्शों से जुड़ने का पावन अवसर गुरुपूर्णिमा: डाॅ प्रणव पण्ड्या
गुरुपूर्णिमा आत्मविश्लेषण, आत्मानुशासन का विशेष दिन: शैलदीदी
हरिद्वार 29 जुलाई। करोड़ों गायत्री साधकों की आस्था के केंद्र गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में गुरुपूर्णिमा पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। पावन गुरुसत्ता के प्रतिनिधि स्वरूप अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं शैलदीदी के सान्निध्य में भारत सहित विभिन्न देशों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पर्व पूजन किया तथा गुरुचरणों के प्रति अपनी कृतज्ञता एवं समर्पण व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रमुखद्वय ने हजारों नए साधकों को गुरुदीक्षा दी।
इस अवसर पर डाॅ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि गुरु दीक्षा साधक को गुरुसत्ता से जोड़ने वाला दिव्य संस्कार है। श्रद्धा गुरु की वह नाव है, जिस पर सवार होकर साधक आध्यात्मिक जीवन की यात्रा प्रारंभ करता है। दीक्षा के माध्यम से गुरुसत्ता की चेतना का एक अंश साधक के अंतःकरण में प्रतिष्ठित होता है। गुरु दीक्षा व्यक्ति के जीवन का कायाकल्प कर उसमें दिव्य गुणों का विकास करती है। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि गुरुपूर्णिमा आत्मचिंतन, आत्मपरिष्कार और गुरु के आदर्शों को जीवन में उतारने का श्रेष्ठ अवसर है।
संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि गुरुपूर्णिमा आत्मानुशासन, आत्मविश्लेषण, श्रद्धा के अभिवर्धन और ज्ञान के पूजन का पावन पर्व है। व्यास पूर्णिमा के इस दिव्य अवसर पर हमें उन महापुरुषों को गुरु रूप में वरण करना चाहिए, जिन्होंने अपनी तपश्चर्या, साधना और त्यागमय जीवन से मानवता के लिए आदर्श स्थापित किए। उन्होंने कहा कि गुरु सद्ज्ञान देने वाले, जीवन को दिशा देने वाले प्रकाश-स्तंभ होते हैं। गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और उनके आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची गुरुपूजा है। श्रद्धेया शैलदीदी ने राजा मनु, महर्षि व्यास, संत ज्ञानेश्वर सहित अनेक ऋषि-मनीषियों, संतों के उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा ने ही समाज को ज्ञान, संस्कार और सदाचार की अमूल्य धरोहर प्रदान की है।
गुरुपूर्णिमा पर्व के अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुखद्वय ने ईएमडी विभाग द्वारा तैयार प्रज्ञागीत के वीडियो एलबम तथा यूथ एण्ड द प्रेजेंड डे चैलेंजेस, फाइण्ड हेपीनेस दिस वे का विमोचन किया। इसके साथ ही नामकरण, मुण्डन, अन्नप्राशन, यज्ञोपवीत एवं गुरुदीक्षा सहित विभिन्न वैदिक संस्कार निःशुल्क सम्पन्न कराए गए। सायंकाल ब्रह्मवादिनी बहनों के संचालन में हजारों दीपों से सुसज्जित विराट दीपमहायज्ञ का आयोजन हुआ, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने विश्वशांति, सद्भावना एवं मानवता के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आहुतियाँ अर्पित कीं।
चालीस दिवसीय चान्द्रायण व्रत – गुरुपूर्णिमा से प्रारंभ हुए चालीस दिवसीय चान्द्रायण व्रत के लिए भारत सहित अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया एवं अन्य देशों के हजार से अधिक साधकों को अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से संकल्प कराया। उन्होंने साधकों से चान्द्रायण व्रत को आत्मशुद्धि, संयम, तप एवं आध्यात्मिक उन्नयन का प्रभावी साधन बताते हुए पूर्ण श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ इसका पालन करने के लिए प्रेरित किया।
