हरिद्वार। अभी विधानसभा चुनाव में वक्त है, लेकिन जनपद की राजनीति में चुनावी बयार अभी से तेज बहने लगी है। सियासी गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि वर्ष 2027 में होने वाले अर्धकुंभ से पहले ही उत्तराखंड विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। बस फिर क्या था, इस संभावना ने हरिद्वार की राजनीति में दावेदारों की फौज खड़ी कर दी है।
भाजपा हो या कांग्रेस, हरिद्वार नगर, रानीपुर, ज्वालापुर, हरिद्वार ग्रामीण और लक्सर जैसी विधानसभा सीटों पर टिकट के दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि जहां पहले कुछ चुनिंदा चेहरे ही चुनावी चर्चा में रहते थे, वहीं अब हर गली, मोहल्ले और संगठन में कोई न कोई खुद को भावी विधायक के रूप में प्रस्तुत करता नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदा विधायकों की स्थिति इतनी मजबूत है कि उनका टिकट कटना लगभग असंभव माना जा रहा है। इसके बावजूद दावेदार पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कोई संगठन के नाम पर सक्रियता दिखा रहा है तो कोई सामाजिक कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के जरिए अपनी पहचान बनाने में जुटा है। दिलचस्प बात यह है कि कई संभावित उम्मीदवार जनता के बीच जाकर अपनी प्राथमिकताओं का खाका भी पेश करने लगे हैं। कोई क्षेत्र में बेहतर सड़कें और जल निकासी व्यवस्था का वादा कर रहा है, तो कोई रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को अपनी प्राथमिकता बता रहा है। कुछ नेता धार्मिक पर्यटन, गंगा घाटों के विकास और ट्रैफिक व्यवस्था को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं। राजनीतिक दलों के स्थानीय कार्यालयों में भी गतिविधियां बढ़ गई हैं। सोशल मीडिया पर पोस्टरों की भरमार है और कई नेताओं के जन्मदिन, सम्मान समारोह तथा जनसेवा कार्यक्रमों के जरिए शक्ति प्रदर्शन शुरू हो चुका है। टिकट की दौड़ में शामिल नेता अपने समर्थकों के साथ लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। इस समय सत्तारूढ़ पार्टी में तो हालात अजीब हो चले हैं, सबसे अधिक चलन इस समय मुख्यमंत्री को पटका या शॉल पहनाने का चल पड़ा है, कुछ लोगों को लग रहा है कि मुख्यमंत्री को पटका या शॉल पहनाने से उनका टिकट पक्का हो जाएगा। हालांकि चुनाव की तारीखों को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संभावित चुनावी माहौल ने हरिद्वार की राजनीति को पूरी तरह गर्मा दिया है। फिलहाल जनता भी दावेदारों की लंबी कतार को देखकर मुस्कुरा रही है और यही सवाल पूछ रही है इतने सारे विधायक बनने को तैयार हैं, लेकिन टिकट आखिर मिलेगा किसे? हरिद्वार की सियासत में फिलहाल एक ही नारा गूंज रहा है कि चुनाव भले ही अभी दूर है, लेकिन दावेदारी अभी से भरपूर है।
