हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एक बार फिर दो गुटों में बंटती नजर आ रही है। हरिद्वार स्थित अटल अखाड़े में परिषद की बैठक के दौरान आठ अखाड़ों के समर्थन से नई कार्यकारिणी का गठन कर दिया गया। बैठक में श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी जी महाराज को सर्वसम्मति से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष तथा श्री पंचायती निर्मोही अखाड़े के श्रीमहंत राजेंद्र दास जी महाराज को महामंत्री चुना गया।
बैठक में श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा, श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, श्री पंचायती निर्मोही अखाड़ा, श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा, श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा, श्री पंचायती अटल अखाड़ा तथा श्री पंचायती निर्वाणी अणी अखाड़ा सहित कुल आठ अखाड़ों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में नई कार्यकारिणी के गठन को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए पदाधिकारियों ने इसे चारों संप्रदायों के प्रतिनिधित्व वाला निर्णय बताया।
नवनियुक्त अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि वे स्वयं अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते थे और किसी नए संत को यह दायित्व सौंपने के पक्षधर थे, लेकिन उपस्थित अखाड़ों के प्रतिनिधियों के आग्रह पर उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वीकार की। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुई है और सभी आवश्यक परंपराओं का पालन किया गया।
वहीं, अखाड़ा परिषद के दूसरे गुट ने इस चुनाव को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। अध्यक्ष श्रीमहंत महेंद्र रवींद्र पुरी और महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरी महाराज का कहना है कि अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी का गठन हमेशा सभी 13 अखाड़ों की उपस्थिति और सहमति से होता है। हरिद्वार की बैठक में सभी अखाड़ों को आमंत्रित नहीं किया गया, इसलिए वहां गठित नई कार्यकारिणी का कोई औचित्य या वैधानिक महत्व नहीं है। श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज, जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरी महाराज और आनंद अखाड़े के श्रीमहंत शंकरानन्द सरस्वती इस पर आश्चर्य जताया। श्रीमहंत हरिगिरी महाराज का कहना है कि वे भी परिषद के नए चुनाव के पक्ष में थे, लेकिन सभी 13 अखाड़ों की सहभागिता के साथ। इससे पहले ही अटल अखाड़े में बैठक बुलाकर नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई।
अब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में नई कार्यकारिणी को लेकर विवाद खुलकर सामने आ गया है। एक पक्ष इसे लोकतांत्रिक जनादेश बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे परंपराओं और नियमों के विपरीत करार दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में परिषद की वैध कार्यकारिणी को लेकर संत समाज में सियासी और धार्मिक हलचल तेज रहने के आसार हैं।
