हरिद्वार, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जनपद हरिद्वार में हरित हरिद्वार अभियान के तहत व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिला प्रशासन, संत समाज, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों एवं आमजन की सहभागिता से पूरे जनपद में 15 हजार से अधिक पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। अभियान का संचालन नोडल अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र के समन्वय में किया गया। शुभारंभ कुंभ मेलाधिकारी सोनिका द्वारा बोगनविलिया का पौधा रोपित कर किया गया, जबकि जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने रुद्राक्ष का पौधा लगाकर जनपदवासियों से पर्यावरण संरक्षण हेतु आगे आने का आह्वान किया। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों, विद्यालयों, सरकारी परिसरों, आश्रमों एवं अखाड़ों में वृक्षारोपण किया गया।
आर्य समाज मंदिर भेल में आयोजित विशेष कार्यक्रम में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कदंब एवं जामुन के पौधे लगाकर वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पद्म भूषण से सम्मानित होने पर उनका नागरिक अभिनंदन भी किया गया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है और युवाओं को आधुनिक तकनीक के साथ आध्यात्मिक मूल्यों को भी अपनाना चाहिए। विधायक आदेश चौहान तथा आर्य समाज भेल के प्रधान बलवीर तलवार ने भी पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी पर बल दिया।
वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मंसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविन्द्रपुरी के नेतृत्व में चरण पादुका मंदिर परिसर में संतों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पौधारोपण कर जल, जंगल और जमीन बचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चित्रकला प्रतियोगिता, पर्यावरण यज्ञ एवं जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रमों में संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं सामाजिक संगठनों ने एक स्वर में पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया। हरिद्वार को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
