देहरादून, 26 मई। उत्तराखंड की स्थाई राजधानी के रूप में गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। समाजसेवी एवं आंदोलनकारी मनमोहन शर्मा पिछले 80 दिनों से लगातार अनशन पर बैठे हैं। सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने पर उन्होंने मंगलवार से मौन व्रत शुरू कर दिया।
एकता विहार लेन नंबर 15 स्थित धरना स्थल पर टेंट लगाकर आंदोलन चला रहे मनमोहन शर्मा का कहना है कि गैरसैंण को केवल ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाकर राज्य की जनता की भावनाओं के साथ न्याय नहीं किया जा सकता। आंदोलनकारियों का मानना है कि पहाड़ों के विकास और पलायन रोकने के लिए गैरसैंण को पूर्णकालिक स्थाई राजधानी घोषित करना जरूरी है।धरना स्थल पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, राज्य आंदोलनकारियों और स्थानीय लोगों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य गठन के वर्षों बाद भी सरकारें गैरसैंण के मुद्दे पर केवल आश्वासन देती रही हैं। सहयोगियों के अनुसार, मनमोहन शर्मा ने सरकार की अंतरात्मा जगाने के उद्देश्य से मौन व्रत धारण किया है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन पूरे प्रदेश में उग्र रूप ले सकता है।
