बहादराबाद में ग्राम समाज की जमीन के विनिमय पर हाईकोर्ट का स्टे, राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
26 अक्टूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई पर टिकी निगाहें, विनिमय की गई जमीन पर रास्ता बनाकर प्लॉट बेचने का भी आरोप
हरिद्वार। बहादराबाद ग्राम पंचायत में ग्राम समाज की बेशकीमती जमीन के विनिमय का मामला अब हाईकोर्ट पहुंचने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्राम सभा की भूमि के विनिमय पर हाईकोर्ट की ओर से स्टे लगाए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जनहित के नाम पर ग्राम समाज की जमीन के विनिमय की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई गई? ग्रामीणों की आपत्तियों और राजस्व विभाग की रिपोर्ट की भूमिका भी अब चर्चा के केंद्र में है। मामले में तत्कालीन लेखपाल संदीप सैनी, तत्कालीन कानूनगो अनिल गुप्ता और तत्कालीन उप जिलाधिकारी अजय वीर सिंह की भूमिका पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन अधिकारियों की जिम्मेदारी और किसी भी कथित अनियमितता की पुष्टि जांच अथवा न्यायिक निर्णय से ही हो सकेगी।
मामले के अनुसार, बहादराबाद में ग्राम समाज की खसरा संख्या 352/2, रकबा 1.009 हेक्टेयर भूमि का विनिमय खसरा संख्या 371/2 मि. और 373 मि. की कुल 1.040 हेक्टेयर बंजर भूमि से किया गया था। बताया जाता है कि विनिमय की गई ग्राम समाज की जमीन पर हरे-भरे पेड़ों का बाग था, जिसमें कई फलदार वृक्ष भी खड़े थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि ग्राम सभा की जमीन पर मौजूद पेड़-पौधे और सार्वजनिक हित महत्वपूर्ण थे, तो विनिमय से पहले इन पहलुओं का कितना आकलन किया गया?
ग्राम पंचायत के प्रस्ताव से लेकर राजस्व रिपोर्ट तक सवाल ही सवाल
इस पूरे प्रकरण में ग्राम पंचायत की बैठक में पारित प्रस्ताव भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस बैठक में जमीन के विनिमय का प्रस्ताव पास किया गया, उसमें अधिकांश ग्राम पंचायत सदस्य मौजूद नहीं थे। बाद में कुछ सदस्यों ने प्रशासन के समक्ष आपत्ति भी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद विनिमय की प्रक्रिया आगे बढ़ने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। अब सवाल तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे हैं। ग्राम समाज की जमीन के विनिमय से संबंधित प्रस्ताव पर राजस्व विभाग की रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि तत्कालीन लेखपाल संदीप सैनी, कानूनगो अनिल गुप्ता और उप जिलाधिकारी अजय वीर सिंह के स्तर पर भूमि की वास्तविक स्थिति, ग्राम पंचायत सदस्यों की आपत्तियों, सार्वजनिक उपयोगिता और विनिमय के औचित्य का किस तरह परीक्षण किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस प्रक्रिया का उद्देश्य ग्राम सभा के हितों की रक्षा करना होना चाहिए था, उसी के तहत एक कॉलोनाइजर को लाभ पहुंचाने वाला विनिमय कर दिया गया। यदि ऐसा हुआ है, तो यह केवल जमीन के आदान-प्रदान का मामला नहीं, बल्कि राजस्व प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
जमीन का विनिमय हुआ, रास्ता बना और बिक गए प्लॉट
इस मामले को और गंभीर बनाने वाला पहलू यह है कि ग्रामीणों के मुताबिक, विनिमय की गई जमीन पर कॉलोनाइजर ने रास्ता बनाकर पीछे स्थित भूखंडों में प्लॉट भी बेच दिए हैं। ऐसे में हाईकोर्ट के स्टे के बाद कॉलोनाइजर की मुश्किलें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि स्टे का दायरा क्या है और इसका जमीन पर किए गए निर्माण, रास्ते तथा भूखंडों की बिक्री पर क्या प्रभाव पड़ता है। ग्रामीणों की आपत्तियों के बाद भी यदि राजस्व विभाग ने जमीन की स्थिति और विनिमय की आवश्यकता का समुचित परीक्षण नहीं किया, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बनेगा। आखिर ग्राम समाज की जमीन का विनिमय किस जनहितकारी उद्देश्य से किया गया था? क्या प्रक्रिया में ग्राम पंचायत सदस्यों की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार हुआ? और क्या विनिमय से पहले तथा बाद की परिस्थितियों का रिकॉर्ड नियमानुसार तैयार किया गया? इन सवालों के जवाब अब मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकते हैं।
26 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी बहादराबाद की निगाहें
ग्राम समाज की जमीन के विनिमय से नाराज बहादराबाद के कुछ ग्रामीणों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ग्रामीणों की ओर से मामले की वस्तुस्थिति अदालत के समक्ष रखे जाने के बाद विनिमय की गई भूमि पर स्टे लगाए जाने की बात सामने आई है। अब 26 अक्टूबर को प्रस्तावित सुनवाई पर ग्रामीणों की निगाहें टिकी हैं। इस सुनवाई में आगे क्या आदेश आता है, यह अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन फिलहाल इस प्रकरण ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और ग्राम समाज की जमीन के संरक्षण को लेकर बहस तेज कर दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस जमीन का इस्तेमाल ग्राम सभा के सामूहिक हितों की रक्षा के लिए होना चाहिए, उसके विनिमय से किसे लाभ मिला और पूरी प्रक्रिया में राजस्व अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी कितनी पारदर्शिता से निभाई?
अब बहादराबाद के ग्रामीणों को अदालत से न्याय की उम्मीद है, जबकि राजस्व विभाग की भूमिका और भूमि विनिमय की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग भी इस मामले में महत्वपूर्ण बनी हुई है।
