देहरादून, 5 अप्रैल। प्राण से प्राण तक के अटल संकल्प के साथ, आज स्थायी राजधानी गैरसैंण के आंदोलन ने देहरादून की धरती पर एक नई ज्वाला प्रज्वलित कर दी है। 8 मार्च से निरंतर चल रहे इस धरने के 29वें दिन, आंदोलन के समर्पित लक्ष्मी प्रसाद रतुड़ी (56 वर्ष) आज से अनशन पर बैठ गए हैं। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में निजी कार्यरत होने के बावजूद, रतुड़ी जी इससे पूर्व 4 बार गैरसैंण की खातिर सड़कों पर उतर चुके हैं, और आज उनके इस 5वें संघर्ष ने व्यवस्था की नींद उड़ा दी है। अनशन स्थल पर अपनी बात रखते हुए लक्ष्मी प्रसाद रतुड़ी ने उन सत्ताधीशों पर सीधा प्रहार किया जो ठंड का बहाना बनाकर पहाड़ों में बैठने से कतराते हैं। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा: जिनको लगती गैरसैंण में ठंड, वो तत्काल छोड़ें उत्तराखंड। यह राज्य शहीदों के बलिदान और हमारे संघर्ष से बना है, एसी कमरों में बैठकर पहाड़ों का भाग्य तय करने वालों का समय अब समाप्त हो चुका है। लक्ष्मी प्रसाद रतुड़ी ने कुछ कड़वे तथ्यों को उजागर करते हुए स्पष्ट किया कि एक आम आदमी जब अपनी आजीविका छोड़कर अनशन पर बैठता है, तो वह क्रांति की दस्तक होती है। उन्होंने कहा कि उनका यह कदम “प्राण से प्राण तक” की लड़ाई है, जिसमें अब पीछे हटने का कोई मार्ग नहीं है। मुख्य संयोजक एवं पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतुड़ी के कुशल नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन को व्यापक राजनीतिक समर्थन भी प्राप्त हुआ। विधायक मदन सिंह बिष्ट और लखपत सिंह बुटोला ने स्वयं अनशन स्थल पर पहुंचकर इस जज्बे का समर्थन किया और आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। अनशनकारी लक्ष्मी प्रसाद रतुड़ी और मुख्य संयोजक विनोद रतुड़ी ने संयुक्त रूप से ऐलान किया है कि अत्यंत शीघ्र हजारों की संख्या में आंदोलनकारी विधानसभा कूच करेंगे। जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर निर्णायक बातचीत की जाएगी। यदि मांगों पर तत्काल प्रभाव से अमल नहीं हुआ, तो यह अनशन ‘आमरण अनशन’ के रूप में तब्दील हो जाएगा, जिसके गंभीर परिणामों की जिम्मेदारी शासन की होगी।
