दौरे पड़ने से बिगड़ी थी गर्भवती प्रियंका की हालत, सुरक्षित प्रसव के बाद दो दिन वेंटिलेटर पर चला उपचार; जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ, पूरी चिकित्सा निशुल्क
हरिद्वार। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची 36 सप्ताह की गर्भवती महिला प्रियंका और उसके नवजात शिशु के लिए हरिद्वार स्थित एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल के चिकित्सक किसी वरदान से कम साबित नहीं हुए। गर्भावस्था के दौरान अचानक दौरे पड़ने से महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की जान पर खतरा मंडरा रहा था। ऐसे नाजुक समय में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने तत्परता दिखाते हुए न केवल सुरक्षित प्रसव कराया, बल्कि महिला को गंभीर स्थिति से उबारने में भी सफलता हासिल की। अब मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
जानकारी के अनुसार, 36 सप्ताह की गर्भवती प्रियंका की हालत दौरे पड़ने के कारण बेहद गंभीर हो गई थी। लक्सर में प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उसे हरिद्वार के एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचने पर महिला की नाजुक स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया।
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अनामिका शाह और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. आस्था सिंह ने अपनी टीम के साथ मिलकर उपचार की कमान संभाली। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने आवश्यक चिकित्सकीय प्रबंधन के साथ सुरक्षित प्रसव कराया। हालांकि प्रसव के बाद भी महिला की स्थिति चिंताजनक बनी हुई थी। ऐसे में उसे दो दिनों तक वेंटिलेटर पर रखकर गहन चिकित्सा दी गई।
चिकित्सकों की निगरानी से लौटी खुशियां
लगातार उपचार, विशेषज्ञों की निगरानी और चिकित्सकीय टीम के प्रयासों के बाद महिला की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। राहत की बात यह है कि अब प्रियंका और उसका नवजात शिशु दोनों स्वस्थ हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, स्वास्थ्य में इसी तरह सुधार जारी रहने पर आगामी एक-दो दिनों में मां और बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।
मानवता की मिसाल, पूरा उपचार निशुल्क
इस पूरे मामले में राहत देने वाली एक और महत्वपूर्ण बात यह रही कि महिला और उसके नवजात शिशु को उपचार के दौरान किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना पड़ा। गंभीर परिस्थिति में निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर अस्पताल ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया।
समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्परता और निरंतर निगरानी ने एक मुश्किल परिस्थिति को राहत भरी खबर में बदल दिया। मां और नवजात की सेहत में सुधार से परिजनों ने भी राहत की सांस ली है। यह मामला गंभीर गर्भावस्था में समय पर उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल के महत्व को रेखांकित करता है।
