तीन बार के विधायक आदेश चौहान के सामने टिकट बचाने की चुनौती, दूसरी बार नगर पालिका अध्यक्ष बने राजीव शर्मा की दावेदारी ने बढ़ाई सियासी हलचल
हरिद्वार। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों में टिकट के दावेदारों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। कांग्रेस हो या भाजपा, बसपा अथवा कोई अन्य दल, हर पार्टी में चुनावी टिकट को लेकर अंदरखाने जोड़-तोड़ और सियासी समीकरण साधने की कवायद तेज होने लगी है। जिन विधानसभा क्षेत्रों में वर्तमान विधायक काबिज हैं, वहां भी दावेदार अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। इसी सियासी हलचल के केंद्र में हरिद्वार की रानीपुर भेल विधानसभा सीट भी है, जहां भाजपा के मौजूदा विधायक आदेश चौहान के सामने इस बार टिकट की चुनौती पहले से अधिक दिलचस्प होती नजर आ रही है।
रानीपुर विधानसभा सीट पर लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके आदेश चौहान की नजर अब चौथी जीत पर है। हालांकि, चुनावी मैदान में उतरने से पहले उनके सामने पार्टी का टिकट हासिल करने की चुनौती भी होगी। भाजपा में इस सीट से केवल आदेश चौहान ही दावेदार हों, ऐसा नहीं है। शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा का नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या भाजपा एक बार फिर आदेश चौहान पर भरोसा जताएगी या इस बार किसी नए चेहरे को मौका देने पर विचार करेगी?
दूसरी बार शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष बने राजीव शर्मा, अब विधानसभा पर नजर
राजीव शर्मा शिवालिक नगर पालिका के दूसरी बार अध्यक्ष चुने जा चुके हैं। स्थानीय निकाय की राजनीति में मिली सफलता के आधार पर उनकी विधानसभा चुनाव में दावेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यदि राजीव शर्मा ने मजबूती से अपनी दावेदारी पेश की, तो भाजपा के टिकट चयन के दौरान मुकाबला रोचक हो सकता है। हालांकि, टिकट को लेकर पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। राजीव शर्मा की दावेदारी कितनी मजबूत होगी और पार्टी नेतृत्व उनके नाम पर कितना गंभीरता से विचार करेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल उनके नाम की चर्चा ने रानीपुर की सियासत में नए समीकरणों की संभावनाएं जरूर बढ़ा दी हैं।
कांग्रेस में भी दावेदारों की लंबी कतार
रानीपुर विधानसभा सीट पर मुकाबला केवल भाजपा के भीतर टिकट की खींचतान तक सीमित नहीं है। कांग्रेस में भी कई नेता अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय बताए जा रहे हैं। ऐसे में भाजपा के लिए उम्मीदवार का चयन आसान नहीं रहने वाला। पार्टी को एक ओर अपने मौजूदा विधायक के राजनीतिक अनुभव और लगातार जीत के रिकॉर्ड को देखना होगा, तो दूसरी ओर स्थानीय समीकरणों और नए दावेदारों की संभावनाओं पर भी विचार करना होगा।
चौथी बार मिलेगा मौका या बदलेगा चेहरा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि लगातार तीन बार विधानसभा पहुंचने वाले आदेश चौहान को भाजपा चौथी बार भी टिकट देकर मैदान में उतारेगी या राजीव शर्मा जैसे दावेदारों को मौका मिल सकता है? क्या मौजूदा विधायक अपनी राजनीतिक पकड़ के दम पर फिर बाजी मारेंगे या टिकट की दौड़ में कोई नया समीकरण सामने आएगा? फिलहाल रानीपुर भेल विधानसभा की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज है। टिकट वितरण तक कई नए मोड़ आ सकते हैं। लेकिन इतना तय है कि इस बार भाजपा के टिकट को लेकर होने वाली कवायद पर सभी की नजरें रहेंगी। आदेश चौहान की चौथी पारी का रास्ता आसान होगा या राजीव शर्मा की दावेदारी नया सियासी खेल रचेगी, इसका जवाब भाजपा के टिकट पर ही निर्भर करेगा।
फिलहाल रानीपुर विधानसभा की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज है। टिकट वितरण तक कई नए मोड़ आ सकते हैं। लेकिन इतना तय है कि इस बार भाजपा के टिकट को लेकर होने वाली कवायद पर सभी की नजरें रहेंगी। आदेश चौहान की चौथी पारी का रास्ता आसान होगा या राजीव शर्मा की दावेदारी नया सियासी खेल रचेगी, इसका जवाब भाजपा के टिकट पर ही निर्भर करेगा।
