हरिद्वार। भूपतवाला स्थित 100 से अधिक वर्ष पुराना अमेरिकन आश्रम, स्वामी देवानंद ट्रस्ट इन दिनों विवादों के केंद्र में है। धार्मिक और सामाजिक आस्था से जुड़े इस ऐतिहासिक आश्रम की संपत्ति को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि ट्रस्ट की जमीन को कथित तौर पर गुपचुप तरीके से रजिस्ट्री कर दिया गया, जबकि धार्मिक ट्रस्ट की संपत्ति के हस्तांतरण को लेकर कानूनी प्रावधानों की अनदेखी का सवाल उठ रहा है। क्षेत्रीय पार्षद सुनीता शर्मा, धर्मशाला समिति के अध्यक्ष राम अवतार शर्मा, सतनाम सिंह और भाजपा नेता विदित शर्मा ने एक ज्ञापन जिलाधिकारी और SSP को सौंपा। उनका कहना है कि यह आश्रम वर्षों से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों की आस्था का केंद्र रहा है। यहां गरीबों के लिए भंडारा, निशुल्क दवा और धर्मशाला जैसी सेवाएं भी संचालित होती थीं। आरोप है कि निजी कब्जे के बाद इन सुविधाओं पर भी असर पड़ा है और कांवड़ मार्ग को बाधित किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
मामले को लेकर भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 की धारा 36 का हवाला देते हुए सवाल उठाए जा रहे हैं कि ट्रस्ट संपत्ति के हस्तांतरण के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक अनुमति का पालन हुआ या नहीं। हालांकि इन आरोपों और संपत्ति के वास्तविक कानूनी हस्तांतरण की स्थिति की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी हरिद्वार और धर्मस्व विभाग से उच्चस्तरीय SIT जांच कराने की मांग की गई है। मांग है कि कथित अवैध बिक्री की जांच कर उसे निरस्त कराया जाए और संपत्ति को संरक्षण में लिया जाए।
साथ ही ट्रस्ट पदाधिकारियों और कथित खरीदारों की भूमिका की जांच कर, दोष सिद्ध होने पर संबंधित कानूनी धाराओं में कार्रवाई की मांग की गई है। अवैध निर्माण की शिकायतों पर तत्काल रोक और नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी उठी है। मांग है कि संपत्ति के सभी कागजात, रजिस्ट्री, ट्रस्ट रिकॉर्ड और बैंक खातों की फोरेंसिक ऑडिट कराई जाए। जांच पूरी होने तक आश्रम की संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए जाएं।
अब बड़ा सवाल यही है कि सौ साल से अधिक पुरानी इस धार्मिक धरोहर की जमीन आखिर किन परिस्थितियों में हस्तांतरित हुई? दस्तावेजों में क्या है और लेन-देन में किसकी क्या भूमिका रही? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकेगा।
