हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में लंबे समय से चली आ रही दो धड़ों की खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। खास बात यह है कि दोनों परिषदों के अध्यक्षों का नाम श्रीमहंत रवींद्र पुरी होने से विवाद और भी दिलचस्प हो गया है। पहली बार ऐसा देखने को मिला जब एक परिषद के अध्यक्ष ने दूसरे धड़े और उससे जुड़े संतों पर खुलकर निशाना साधा।
निरंजनी अखाड़े के सचिव एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने पत्रकारों से बातचीत में उदासीन अखाड़े के महंत दुर्गादास के बयानों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि “दुर्गादास कौन होते हैं मुझे और श्रीमहंत हरिगिरी महाराज को अखाड़ा परिषद से निकालने वाले?”
श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने केवल महंत दुर्गादास पर ही नहीं, बल्कि दूसरी अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वे न तो दिवंगत महंत सुधीर गिरी हैं, जिनकी हत्या हुई थी, और न ही वे लापता महंत मोहनदास हैं। उनके खिलाफ इस तरह की अनर्गल बयानबाजी किसी भी संत को शोभा नहीं देती।
इस दौरान उन्होंने महंत सुधीर गिरी हत्याकांड की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने और लंबे समय से लापता महंत के मामले की भी पुनः जांच कराने की मांग उठाई। रवींद्र पुरी जी महाराज के इस बयान के बाद अखाड़ा परिषद के दोनों धड़ों के बीच सियासी और धार्मिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। अब संत समाज की नजर इस बात पर टिकी है कि इस बयानबाजी का अगला अध्याय क्या होगा।
