टेक्सटाइल, MSMEs, SHGs और FPOs को जोड़कर निर्यात बढ़ाने की तैयारी, उद्योगों की समस्याओं के समाधान पर प्रशासन गंभीर
हरिद्वार, 16 मई। हरिद्वार को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत निर्यात हब के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में आयोजित जिला निर्यात प्रोत्साहन समिति (DEPC) की बैठक में डिस्ट्रिक्ट्स ऐज़ एक्सपोर्ट हब (DEH) योजना के तहत निर्यात बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति पर मंथन किया गया। बैठक में जिला निर्यात कार्ययोजना (DEAP) की समीक्षा करते हुए टेक्सटाइल सेक्टर को निर्यात से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशासन का लक्ष्य केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि MSMEs, स्वयं सहायता समूह (SHGs) और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को भी वैश्विक बाजार से जोड़ना है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (MSY) समेत अन्य योजनाओं में निर्यात उन्मुख इकाइयों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही ऐसे उद्यमियों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण, प्रमाणन, ऋण सुविधा और लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराया जाए। बैठक में उद्योगों और निर्यातकों के सामने आने वाली समस्याओं और बॉटलनेक्स पर भी गंभीर चर्चा हुई। प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाने और औद्योगिक इकाइयों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए समन्वय के साथ कार्य किया जाए। डीएम मयूर दीक्षित ने कहा कि हरिद्वार में उद्योग, कृषि उत्पाद और टेक्सटाइल सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए तो जनपद आने वाले समय में उत्तराखंड का प्रमुख निर्यात केंद्र बन सकता है। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, महाप्रबंधक उद्योग उत्तम कुमार तिवारी, जिला परियोजना प्रबंधक संजय सक्सेना, मुख्य कृषि अधिकारी गोपाल सिंह भंडारी, मुख्य उद्यान अधिकारी तेजपाल सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि और निर्यातक मौजूद रहे।
