हरिद्वार, 28 अप्रैल। हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एक बार फिर अपनी सख्ती के साथ-साथ संवेदनशील कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार सुबह एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने मौजूद लोगों का दिल जीत लिया। दरअसल, जिलाधिकारी आज सुबह जब कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय पहुंचे तो उनकी नजर एक छोटे बच्चे पर पड़ी, जो अपनी मां के साथ मजदूरी स्थल पर मौजूद था। पूछताछ में पता चला कि बच्चा स्कूल जाने वाला है, लेकिन उस दिन वह अपनी मां के साथ ही काम पर आ गया था। यह सुनते ही डीएम ने तुरंत बच्चे को अपने पास बुलाया और बेहद स्नेहपूर्वक उसे शिक्षा का महत्व समझाया। जिलाधिकारी ने बच्चे से कहा कि पढ़ाई ही उसके उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है और उसे नियमित रूप से स्कूल जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने उसकी मां को भी स्पष्ट शब्दों में समझाया कि बच्चे को काम के स्थान पर लाने के बजाय स्कूल भेजना ज्यादा जरूरी है। डीएम की बातों का असर तुरंत दिखा। बच्चे की मां ने आश्वासन दिया कि आगे से वह बच्चे को नियमित स्कूल भेजेगी और उसे साथ नहीं लाएगी। वहीं बच्चे ने भी उत्साह के साथ पढ़ाई जारी रखने का वादा किया। मूल रूप से शामली निवासी यह परिवार रावली महदूद में किराये पर रहकर कलेक्ट्रेट में मजदूरी करता है। जिलाधिकारी के इस मानवीय कदम की परिसर में मौजूद लोगों ने जमकर सराहना की। सख्ती और संवेदनशीलता का यह संतुलन ही मयूर दीक्षित को एक अलग पहचान दिला रहा है, जहां वे प्रशासनिक अनुशासन के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहे हैं।
