हरिद्वार। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने जानकारी देते हुए बताया कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में प्राचीन पांडुलिपियों, ताड़पत्र, भोजपत्र एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक चेतना के अमूल्य साक्ष्य हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने बताया कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत देशभर में उपलब्ध पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य इन धरोहरों को शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाना है। डॉ. मिश्र ने कहा कि उत्तराखंड, जो प्राचीन ज्ञान, दर्शन और संस्कृति की भूमि रहा है, इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मठ-मंदिरों, पुस्तकालयों और आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने पास उपलब्ध पांडुलिपियों की प्रतियां जिला सूचना कार्यालय, देवपुरा चौक में उपलब्ध कराएं, ताकि उनका डिजिटलीकरण कर ‘ज्ञान भारतम् पोर्टल’ पर संरक्षित किया जा सके।
