हरिद्वार। उत्तराखंड में सरकारी संपत्तियों को लीज पर दिए जाने का मुद्दा अब सियासी तकरार का बड़ा कारण बन गया है। सरकार के फैसले के विरोध में कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है, तो भाजपा ने कांग्रेस के आंदोलन को खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने की कवायद करार दिया है। बुधवार को हरिद्वार के अलकनंदा घाट पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जमकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान हरीश रावत ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारी संपत्तियों को लीज पर देने के नाम पर जिस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, कांग्रेस उसका पुरजोर विरोध करती है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने निवेशकों को भी आगाह किया कि जो लोग इन संपत्तियों में निवेश करने की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें कांग्रेस के प्रखर विरोध का सामना करना पड़ सकता है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए कि यह मुद्दा केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप दिया जा सकता है। इस दौरान कांग्रेस के ज्वालापुर विधायक रवि बहादुर, डॉक्टर संजय पालीवाल, मकबूल कुरैशी, अशोक शर्मा, वीरेंद्र सिंह रावत, नगर अध्यक्ष अमन गर्ग, महेश प्रताप राणा, मनोज सैनी राव आफाक रवीश भटीजा सहित कई कांग्रेसी नेता मौजूद थे।
वहीं कांग्रेस के प्रदर्शन पर भाजपा के जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए इस तरह के प्रपंच कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा सरकारी परिसंपत्तियों को बेचने की नहीं है। जिन संपत्तियों को लीज पर दिया जा रहा है, उनका स्वामित्व सरकार के पास ही रहेगा। आशुतोष शर्मा ने कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा हमेशा सरकारी संपत्तियों को बेचने के विरोध में रही है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि यदि कांग्रेस लीज पर देने की नीति का ही विरोध कर रही है, तो उत्तराखंड में लीज पर संचालित फैक्ट्रियों को भी क्या कांग्रेस हटवाने की मांग करेगी? प्रेस वार्ता में विकास तिवारी, लव कुमार शर्मा, हीरा सिंह बिष्ट, लोकेश पाल मौजूद थे।
कुल मिलाकर सरकारी संपत्तियों को लीज पर देने का मुद्दा अब विकास और निवेश की नीति से आगे बढ़कर भाजपा-कांग्रेस के बीच सियासी प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता नजर आ रहा है। एक ओर कांग्रेस इसे सरकारी संपत्तियों के हितों से जुड़ा सवाल बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे कांग्रेस की राजनीतिक हताशा बता रही है।
