नीदरलैंड के तकनीकी विशेषज्ञों ने किया प्रस्तावित ‘ग्रीन घाट’ और आस्था पथ का निरीक्षण, एनएमसीजी के साथ मिलकर तैयार होगी पर्यावरण अनुकूल योजना
हरिद्वार, 18 सितंबर। कुंभ मेला-2027 में धर्मनगरी हरिद्वार के गंगा घाट केवल आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल भी बनेंगे। गंगा तटों को नया और हरित स्वरूप देने की दिशा में कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के सहयोग से नीदरलैंड के तकनीकी विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को हरिद्वार पहुंचकर प्रस्तावित ‘ग्रीन घाट’ क्षेत्र और आस्था पथ का स्थलीय निरीक्षण किया।
हरकी पैड़ी को जोड़ने वाले धनुष पुल से बैरागी कैंप तक प्रस्तावित आस्था पथ को इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। योजना के तहत आस्था पथ से जुड़े गंगा घाटों को भी हरित घाट के रूप में विकसित करने की परिकल्पना है। इससे श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए तैयार होने वाला मार्ग जहां सुविधाजनक होगा, वहीं गंगा तट का क्षेत्र हरियाली, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी आकर्षक बनाया जाएगा।
भारत और नीदरलैंड के बीच शहरी नदी प्रबंधन कार्यक्रम के तहत इस परियोजना को तकनीकी सहयोग मिल रहा है। नीदरलैंड के विशेषज्ञों ने आस्था पथ और प्रस्तावित ग्रीन घाट क्षेत्र का भ्रमण कर वहां की भौगोलिक परिस्थितियों, हरित आवरण, घाट विकास और पर्यावरणीय संभावनाओं का जायजा लिया।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने मेला नियंत्रण भवन में मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका से मुलाकात की। बैठक में कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के साथ गंगा तटों की स्वच्छता, हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। मेलाधिकारी ने कुंभ की तैयारियों की जानकारी देते हुए गंगा तटों को पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया।
नगर आयुक्त हरिद्वार नंदन कुमार ने भी प्रतिनिधिमंडल को ग्रीन घाट परियोजना की रूपरेखा और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
प्रतिनिधिमंडल में नई दिल्ली स्थित नीदरलैंड दूतावास के नामित प्रतिनिधि (जल) मॉरित्स बोसमैन, नीदरलैंड के जल प्रबंधन मंत्रालय के कार्यक्रम प्रबंधक सेन्डर कारपेज, एनएमसीजी के प्रतिनिधि जय दिघे और पंकज रावत शामिल रहे।
कुंभ-2027 के दौरान यदि यह योजना आकार लेती है तो हरिद्वार के गंगा घाटों पर श्रद्धा के साथ हरियाली का संगम भी देखने को मिलेगा। यानी इस बार कुंभ में आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण भी घाटों की नई पहचान बन सकता है।
