हरिद्वार, 8 जुलाई। हरिद्वार के नारसन विकासखंड की ग्राम पंचायत पीरपुरा में मनरेगा कार्यों की जांच के दौरान चौंकाने वाला मामला सामने आया है। परिवहन विभाग के हरिद्वार डिपो में संविदा परिचालक के रूप में कार्यरत एक व्यक्ति को मनरेगा मजदूर दिखाकर सरकारी भुगतान कर दिया गया। मामला उजागर होने के बाद संबंधित व्यक्ति को ₹19,754 की पूरी राशि सरकारी खजाने में वापस जमा करनी पड़ी। लोकपाल मनरेगा बी.एस. नेगी ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच कराई। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत में तालाब की मिट्टी का अवैध विक्रय किया गया और मनरेगा के तहत फर्जी भुगतान किए गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वसीम पुत्र इदरीश, जो परिवहन विभाग में संविदा परिचालक हैं, उनके नाम से मनरेगा में मजदूरी का भुगतान किया गया। 29 मई 2026 को हुए स्थलीय निरीक्षण और अभिलेखों की जांच में कई तथ्य सामने आए। वसीम ने लोकपाल के समक्ष स्वीकार किया कि उनसे त्रुटिवश मनरेगा का भुगतान प्राप्त हुआ था। उन्होंने पूरी ₹19,754 की राशि खंड विकास अधिकारी, नारसन के माध्यम से राजकोष में जमा कराते हुए भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का आश्वासन दिया। लोकपाल ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित अवधि में वसीम परिवहन विभाग में कार्यरत थे, ऐसे में उन्हें मनरेगा मजदूर दर्शाकर भुगतान किया जाना गंभीर लापरवाही का मामला है। हालांकि राशि वापस जमा हो चुकी है, लेकिन यह प्रकरण मनरेगा में रिकॉर्ड सत्यापन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। कार्रवाई करते हुए लोकपाल ने ग्राम रोजगार सहायक पर गलत मस्टर रोल तैयार करने और भुगतान की संस्तुति करने के लिए ₹1,000 तथा तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी पर भी ₹1,000 का जुर्माना लगाया है। साथ ही बीडीओ नारसन को दंडादेश का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित कर निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
