हरिद्वार 1 दिसंबर। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज गीता जयंती को संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी का 73वाँ जन्मदिन पवित्र, शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान सादगी, संयम और संस्कारित भावनाओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिला, जो स्वयं दीदी के जीवनदर्शन का प्रतिबिंब है।
शांतिकुंज परिसर में वैदिक मंत्रों के सामूहिक उच्चारण से वातावरण अभिभूत हो उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप महायज्ञ के माध्यम से हुआ। शांतिकुंज व देवसंस्कृति विवि परिवार के साधकों ने शैलदीदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और जगतकल्याण की भावना के लिए विशेष मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञाहुतियाँ समर्पित कीं। यज्ञ के दौरान शांति, सकारात्मक ऊर्जा और दिव्यता का वातावरण उपस्थित लोगों के मन में श्रद्धा और आत्मिक उत्साह भरता रहा।
अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने शैलदीदी को मंगल-तिलक अर्पित किया तथा पुष्पहार पहनाकर परिवार की ओर से शुभकामनाएँ व्यक्त कीं। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या सहित शांतिकुंज, देसंविवि और गायत्री विद्यापीठ परिवार ने भी पुष्पगुच्छ भेंटकर श्रद्धा और शुभेच्छाएँ प्रकट कीं। इस दौरान शांतिकुंज के नौनिहालों बाल साधकों द्वारा दी गई शुभकामनाओं ने वातावरण में विशेष उल्लास और आत्मीयता भर दी।
इस अवसर पर उनके जीवन मूल्यों आत्मिक उन्नति, नि:स्वार्थ सेवा, अनुशासन, तथा प्रेम और स्नेह के प्रसार को विशेष रूप से स्मरण किया गया। साथ ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन और सांस्कृतिक जागरण के लिए गायत्री परिवार द्वारा किए जा रहे प्रयासों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया गया।
गीता जयंती पर आयोजित 27 कुण्डीय यज्ञ में बड़ी संख्या में साधकों ने सहभाग किया। सामूहिक प्रार्थनाओं और यज्ञाहुतियों के माध्यम से सभी ने दीदी के निरंतर स्वस्थ, सक्रिय एवं दीर्घ जीवन की मंगल कामना की।
