
हरिद्वार ( रूपेश वालिया ) बुधवार की देर रात रामकृष्ण मिशन अस्पताल में जो हुआ वह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा ही है, लेकिन मज़े की बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है बल्कि एम्बुलेंस चालक पर ही दोष मढ़ता नजर आ रहा है। रामकृष्ण मिशन अस्पताल का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें अस्पताल का गार्ड एंबुलेंस रोकने के लिए एंबुलेंस के पीछे बैठ गया। मृत किशोरी के परिजनों ने गार्ड की बहुत मिन्नतें की लेकिन गार्ड नहीं माना और एंबुलेंस को अस्पताल परिसर में नहीं घुसने दिया। तब लाचार परिजन किशोरी के शव लेकर गोदी में लेकर एंबुलेंस में आए और पोस्टमार्टम के लिए ले गए। हालांकि जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने पूरे मामले की जांच के आदेश मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दे दिए हैं और तत्काल रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा है।
घटनाक्रम के बाद रामकृष्ण मिशन अस्पताल के सचिव दयामुर्तियानंद ने भी प्रेस वार्ता कर अपना पक्ष रखा लेकिन किसी भी सवाल का सही जवाब नहीं दिया। उनकी बातों से ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें यह लग रहा हो की रामकृष्ण मिशन अस्पताल में बुधवार की रात जो कुछ भी हुआ वह सुनियोजित साजिश के तहत किया गया। उन्होंने कहा कि मरीजों की सेवा करना रामकृष्ण मिशन अस्पताल का प्रमुख कर्तव्य है कुछ लोग नाहक ही मामले को तूल दे रहे हैं।
वीडियो में साफ-साफ देखा जा सकता है कि एंबुलेंस को रोकने के लिए अस्पताल के गेट पर खड़ा हुआ गार्ड एंबुलेंस के पीछे लेट गया है ताकि एंबुलेंस अस्पताल परिसर में प्रवेश न कर सके अब इसे संवेदनहीनता नहीं तो और क्या कहेंगे?