सवा तीन किलोमीटर क्षेत्र में बन रहे 10 नए घाटों का अधिकांश काम पूरा, 56 पुराने घाटों के जलमग्न हिस्सों की मरम्मत भी पूरी, 30 नवंबर तक अंतिम रूप लेने की तैयारी
हरिद्वार। कुंभ-2027 की तैयारियों के बीच हरिद्वार में गंगा घाटों के निर्माण और मरम्मत को लेकर मेला प्रशासन ने एक बड़ी चुनौती पार कर ली है। गंगा नहर की बंदी को अवसर में बदलते हुए सिंचाई विभाग ने दिन-रात युद्धस्तर पर काम कर उन महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों को समय से पहले पूरा कर लिया, जिन्हें गंगा में सामान्य जलप्रवाह शुरू होने के बाद करना बेहद मुश्किल हो जाता।
मेलाधिकारी सोनिका के निर्देश पर गंगा नहर क्लोजर की पूरी अवधि का भरपूर इस्तेमाल किया गया। घाटों के जलमग्न रहने वाले हिस्सों और नदी तल में जलस्तर से नीचे होने वाले निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए श्रमिकों और मशीनों को लगातार काम पर लगाया गया। निर्माण की गुणवत्ता और समयसीमा पर अधिकारियों की पैनी नजर रही। आखिरकार नहर में पानी छोड़े जाने से पहले ही जरूरी कार्य पूरे कर लिए गए। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अनुभव नौटियाल के मुताबिक, कुंभ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार में करीब सवा तीन किलोमीटर लंबाई में 10 नए घाटों का निर्माण कराया जा रहा है। इन घाटों का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है। शेष काम 30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इतना ही नहीं, अपर गंगा कैनाल के 34 पुराने घाटों औjर एस्केप चैनल के 22 घाटों के जलमग्न हिस्सों की मरम्मत भी पूरी कर ली गई है। यानी नए घाटों को आकार देने के साथ ही पुराने घाटों को भी दुरुस्त करने का काम तेजी से आगे बढ़ा है।
अब गंगा नहर में सामान्य जलप्रवाह शुरू होने के बाद जलस्तर से ऊपर के शेष निर्माण कार्यों के साथ सौंदर्यीकरण और फिनिशिंग पर जोर रहेगा।
कुल मिलाकर कुंभ-2027 से पहले हरिद्वार के घाटों को नया स्वरूप देने की दिशा में मेला प्रशासन ने अहम कदम बढ़ाया है। अब चुनौती इन कार्यों को निर्धारित समय में गुणवत्ता के साथ पूरा कर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक घाट तैयार करने की है।
