जलस्तर कम होने का मेला प्रशासन उठा रहा पूरा फायदा, हरकी पैड़ी सहित प्रमुख घाटों को चमकाने में जुटा विभाग, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मजबूत रेलिंग और बेहतर रोशनी पर जोर
हरिद्वार, 4 नवंबर। कुंभ-2027 से पहले धर्मनगरी हरिद्वार के घाटों की सूरत संवारने का काम तेज हो गया है। गंगा नहर बंदी को मेला प्रशासन ने एक बड़े अवसर के रूप में लिया है। जिस दौरान गंगा के जल में डूबे रहने वाले घाटों के हिस्सों तक पहुंचना मुश्किल होता है, अब उन्हीं हिस्सों की मरम्मत और जीर्णोद्धार का काम तेजी से कराया जा रहा है। मेला प्रशासन की कोशिश है कि कुंभ शुरू होने से पहले हरकी पैड़ी से लेकर प्रमुख घाटों और हाथीपुल तक सब कुछ चाक-चौबंद हो जाए।
इसी कड़ी में बुधवार को अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने हरकी पैड़ी एवं रोड़ी बेलवाला पुनर्विकास योजना के तहत चल रहे निर्माण और मरम्मत कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था यूपीडीसीसी के अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि गंगा नहर बंदी की अवधि का एक-एक दिन महत्वपूर्ण है। इसलिए जलमग्न रहने वाले हिस्सों की मरम्मत में कोई ढिलाई न बरती जाए और प्राथमिकता के आधार पर काम पूरा किया जाए।
निरीक्षण के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष जोर देखने को मिला। अपर मेलाधिकारी ने घाटों पर मजबूत और पर्याप्त ऊंचाई वाली रेलिंग तथा चेन लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने मौके पर लगी रेलिंग की मजबूती और निर्माण की गुणवत्ता भी परखी। साफ कहा कि कुंभ में लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचेंगे, ऐसे में सुरक्षा इंतजामों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
वहीं, हाथीपुल को भी नया और सुरक्षित स्वरूप देने की तैयारी है। अपर मेलाधिकारी ने पुल पर सुरक्षा रेलिंग का काम जल्द पूरा करने के साथ प्रवेश द्वार और स्तंभों पर लगी मूर्तियों की मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण कराने के निर्देश दिए। पुल पर बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा, ताकि रात के समय आवाजाही सुरक्षित रहने के साथ पुल की सुंदरता भी निखर सके।
इसके बाद उन्होंने विष्णुघाट, कुशावर्त घाट, गौ घाट, सुभाष घाट और मालवीय द्वीप का निरीक्षण किया। यहां क्षतिग्रस्त टाइल्स और पत्थरों को जल्द बदलने के निर्देश दिए गए। खास बात यह रही कि मरम्मत के नाम पर घाटों का मूल स्वरूप बिगड़ने न पाए, इसके लिए नई टाइल्स और पत्थरों के रंग, आकार और डिजाइन में पुरानी संरचना जैसी एकरूपता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
अपर मेलाधिकारी ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयसीमा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। अब देखना यह है कि नहर बंदी के इस महत्वपूर्ण अवसर का कितना बेहतर इस्तेमाल होता है और कुंभ से पहले हरिद्वार के घाट श्रद्धालुओं को कितना सुरक्षित और सुंदर स्वरूप दे पाते हैं।
निरीक्षण के दौरान तकनीकी सेल के अधीक्षण अभियंता मनोज भट्ट, यूपीडीसीसी के परियोजना प्रबंधक सुमित मलवाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
