भूमा पीठाधीश्वर बोले, हरिद्वार के कई आश्रमों पर कब्जों के आरोप, सत्ता के डर से संत बांट रहे हैं ईमानदारी के प्रमाण पत्र
हरिद्वार। अयोध्या राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं और लूट के आरोपों को लेकर भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज ने हरिद्वार के संत समाज पर तीखा हमला बोला है। प्रेस को जारी विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि राम मंदिर प्रकरण में कुछ संतों द्वारा संबंधित अधिकारियों को क्लीन चिट देना इस बात का संकेत है कि या तो वे डरे हुए हैं, या फिर सत्ता की चापलूसी कर रहे हैं अथवा किसी लाभ की आशा में ऐसा कर रहे हैं।
स्वामी अच्युतानंद ने आरोप लगाया कि हरिद्वार में वर्षों से आश्रमों और धार्मिक संपत्तियों पर कब्जों का खेल चलता रहा है, लेकिन संत समाज का बड़ा वर्ग इन मामलों पर मौन साधे बैठा है। उन्होंने दावा किया कि खड़खड़ी, कनखल और शंकर आश्रम क्षेत्र सहित कई स्थानों पर धार्मिक संपत्तियों पर कब्जे हुए हैं और कुछ मामलों में संतों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
उन्होंने कहा कि इतिहास स्वयं को दोहरा रहा है। सोमनाथ मंदिर की लूट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज प्रभु श्रीराम के नाम पर बने भव्य मंदिर को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। उनका कहना था कि ये आरोप किसी विरोधी द्वारा नहीं, बल्कि मंदिर समिति से जुड़े लोगों द्वारा ही लगाए गए हैं।
स्वामी अच्युतानंद ने उन संतों पर भी निशाना साधा जिन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी को ईमानदारी का प्रमाण पत्र दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रमाण पत्र बांटने वालों में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन पर वन भूमि, गौशाला भूमि और धार्मिक संपत्तियों पर अतिक्रमण के आरोप लगते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार में गंगा तटों तक को नहीं छोड़ा गया और नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य किए गए। उनका आरोप है कि सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों द्वारा आश्रमों और धार्मिक संस्थाओं पर कब्जे किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन संत समाज खुलकर विरोध करने का साहस नहीं जुटा पा रहा।
स्वामी अच्युतानंद ने सवाल उठाया कि यदि संत समाज वास्तव में धर्म और सत्य के पक्ष में खड़ा है तो उसे किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या कब्जे के खिलाफ निर्भीक होकर आवाज उठानी चाहिए, चाहे मामला राम मंदिर का हो या हरिद्वार के आश्रमों का।
