हरिद्वार 12 मार्च। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ईंधन, गैस और बिजली की खपत कम करने के लिए विशेष पहल शुरू की गई है। इस संबंध में संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कार्यसमिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें ऊर्जा संरक्षण और सामूहिक अनुशासन पर बल दिया गया। साथ ही विश्व में शांति एवं सद्भाव हेतु विशेष आध्यात्मिक सामूहिक अनुष्ठान किया जायेगा। इस अनुष्ठान में भारत सहित विश्व भर के करोड़ों गायत्री परिजन गायत्री महामंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र की साधना में जुटेंगे। बैठक में चर्चा के दौरान बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तेल उत्पादक क्षेत्रों में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण ईंधन आपूर्ति पर प्रभाव पडऩे की आशंका व्यक्त की जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में आवश्यक है कि समाज और संस्थाएं ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में पहल करें। इसी दृष्टि से शांतिकुंज परिवार ने ईंधन की खपत को कम करने और वैकल्पिक व्यवस्थाओं को अपनाने का निर्णय लिया है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सामूहिकता की भावना के साथ दैनिक जीवन में सादगी और संयम को बढ़ावा दिया जाएगा। अनावश्यक वाहन उपयोग को कम करने, सामूहिक परिवहन व्यवस्था को प्रोत्साहित करने तथा ऊर्जा बचत के अन्य उपायों को अपनाने पर जोर दिया गया। साथ ही रसोई व्यवस्था में गैस के उपयोग को संतुलित करने और बिजली की खपत को कम करने के लिए भी कई व्यावहारिक कदम उठाए जाएंगे। बताया गया कि इस पहल के अंतर्गत शांतिकुंज में निवास करने वाले एक हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने ऊर्जा संरक्षण के इस संकल्प का समर्थन किया है। सभी ने यह सहमति दी है कि वे अपने दैनिक जीवन में ईंधन, गैस और बिजली के उपयोग में संयम बरतेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।
इस अवसर पर संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि वर्तमान समय में संसाधनों का संतुलित उपयोग अत्यंत आवश्यक है। यदि प्रत्येक व्यक्ति थोड़ी सावधानी और जागरूकता बरते, तो ऊर्जा संकट जैसी समस्याओं से काफी हद तक निपटा जा सकता है। उन्होंने कहा कि शांतिकुंज सदैव समाज के लिए आदर्श प्रस्तुत करने का प्रयास करता रहा है और ऊर्जा संरक्षण की यह पहल भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ चिन्मय पण्ड्या ने बताया कि विश्व के 80 से अधिक देशों के 15 करोड़ से ज्यादा गायत्री परिवार के स्वयंसेवकों को पत्र आदि भेजकर ऊर्जा संकट के आहट के बीच सावधानी बरतनी के लिए कहा जा रहा है। वहीं देव संस्कृति विश्वविद्यालय भी इस दिशा में सार्थक पहल करने की तैयारी कर रहा है।
