हरिद्वार, 7 मार्च। हरिद्वार के बैरागी कैंप में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए और उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक संदेश भी दिया, लेकिन भाजपा की इस बहुप्रचारित जनसभा में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट पाई। कार्यक्रम को लेकर पार्टी के प्रदेश नेतृत्व और स्थानीय नेताओं द्वारा किए गए बड़े-बड़े दावे हवाई साबित ही नहीं हुए बल्कि फुस्स हो गए। भाजपा की ओर से दावा किया जा रहा था कि इस जनसभा में करीब डेढ़ लाख लोग शामिल होंगे और यह रैली आगामी विधानसभा चुनावों के लिए शक्ति प्रदर्शन का मंच बनेगी, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग दिखाई दी। तमाम तैयारियों और दावों के बावजूद कार्यक्रम स्थल पर बमुश्किल 10 से 15 हजार लोगों की भीड़ ही नजर आई। देखें वीडियो 👇
दरअसल यह कार्यक्रम राज्य में पुष्कर सिंह धामी सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। इसी मंच से यह भी माना जा रहा था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आगामी विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंकेंगे। अमित शाह ने अपने संबोधन में सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए चुनावी संदेश भी दिया, लेकिन जनसभा में अपेक्षित जनसैलाब न उमड़ने से कार्यक्रम की राजनीतिक धार कुछ फीकी पड़ती दिखी। रैली को सफल बनाने के लिए भाजपा के कई संभावित विधानसभा दावेदार पिछले कई दिनों से अपने-अपने क्षेत्रों में भीड़ जुटाने के प्रयास कर रहे थे। माना जा रहा था कि यह रैली उनके लिए शक्ति प्रदर्शन का अवसर होगी, जिसमें वे अधिक से अधिक समर्थकों को लाकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का प्रयास करेंगे। लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट रही और अधिकांश दावेदार अनुमान के मुताबिक भीड़ जुटाने में असफल रहे।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी जनसभा के लिए जिस स्तर पर भीड़ जुटाने की तैयारी होनी चाहिए थी, वह दिखाई नहीं दी। कई जगहों से कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लाने की व्यवस्था भी कमजोर रही, जिसके कारण अपेक्षित संख्या में लोग कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए।
अमित शाह जैसे बड़े नेता की मौजूदगी के बावजूद जनसभा में भीड़ कम रहना भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा भी तेज है कि यदि पार्टी अपने शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी को भी प्रभावी तरीके से भुना नहीं पाती, तो आगामी चुनावी रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है।
फिलहाल, भाजपा नेताओं की ओर से कार्यक्रम को सफल बताया जा रहा है, लेकिन जनसभा में अपेक्षित भीड़ न आने से प्रदेश नेतृत्व की पेशानी पर बल पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में पार्टी संगठन इस स्थिति से क्या सबक लेता है और चुनावी तैयारियों को किस तरह धार देता है।
