देहरादून 2 फरवरी। श्री रघुनाथ मंदिर क्लेमनटाउन में मां ज्वाल्पा देवी कीर्तन मण्डली द्वारा आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा का आज भावपूर्ण, प्रेरणादायी और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत वातावरण में हवन एवं विशाल भण्डारे के साथ विधिवत समापन हुआ। यह दिव्य आयोजन सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) पूज्य स्वामी रसिक महाराज के पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं मार्गदर्शक उद्बोधन से और भी अधिक अनुप्राणित रहा। उनके श्रीमुख से नौ दिनों तक निरंतर प्रवाहित हुई देवी भागवत ज्ञान गंगा ने आयोजक मां ज्वाल्पा देवी कीर्तन मण्डली सहित समस्त श्रोताओं के हृदय, चिंतन और जीवन को गहराई से स्पर्श किया।
समापन अवसर पर पूज्य स्वामी रसिक महाराज ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि हमारे शास्त्रों में हमारी संस्कृति, मूल्य और जीवन-दृष्टि समाहित है। श्रीमद् देवी भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह हमें स्मरण कराती है कि हम कौन हैं, हमारा उद्देश्य क्या है और हमें किस दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् देवी भागवत भारतीय संस्कृति का दर्पण है, जिसमें भक्ति, ज्ञान, कर्म, करुणा और सेवा का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
पूज्य स्वामी ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों की चर्चा करते हुए कहा कि आज जब समाज तनाव, अवसाद, हिंसा, असहिष्णुता और मूल्यहीनता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे समय में कथाओं की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि कथाएँ केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता और भविष्य का मार्गदर्शन हैं। जब मन भटकता है, कथा दिशा देती है; जब जीवन सूना लगता है, कथा आशा जगाती है; और जब समाज बिखरता है, कथा उसे जोड़ने का कार्य करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि श्रीमद् देवी भागवत हमें यह संदेश देती है कि भक्ति पलायन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है, प्रेम दुर्बलता नहीं, बल्कि सबसे बड़ी शक्ति है; और सेवा ही सच्ची साधना है। मां जगदम्बा का संपूर्ण चरित्र इस बात का प्रमाण है कि किस प्रकार उन्होंने लोककल्याण, धर्मरक्षा और मानवता की स्थापना के लिए सक्रिय और प्रेरक भूमिका निभाई। पूज्य स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि कथा हमें संस्कार देती है, संस्कार से चरित्र का निर्माण होता है और चरित्र से राष्ट्र का निर्माण होता है। उन्होंने यह भी आह्वान किया कि आज आवश्यकता है कि हम कथाओं को केवल सुनें नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारें, तभी कथाओं का वास्तविक उद्देश्य सिद्ध होगा। इस अवसर पर उन्होंने हरित कथाओं, पर्यावरण संरक्षण तथा सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त भंडारों के आयोजन का भी संदेश दिया। आज समापन अवसर पर कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकान्त धस्माना ने उपस्थित जनसमुदाय को सनातनी संस्कृति अपनाने का आग्रह किया और भगवती मां जगदम्बा के क्षमा स्तोत्र का महत्व बताया।
ज्वाल्पा देवी कीर्तन मण्डली की संयोजक श्रीमती मंजू कोटनाला एवं नृसिंह भक्ति सेवा संस्थान भारतवर्ष की राष्ट्रीय प्रभारी साध्वी मां देवेश्वरी जी धर्मपुर विधायक विनोद चमोली, नीमा रौथाण, अंजू ध्यानी, बंगला रानी, अंजू विष्ट, कमला रावत, सत्तेश्वरी कुकरेती, सरोज थपलियाल, सुशीला बुटोला, लता सिंह, रमा लिंगवाल, सम्पूर्णानंद मुंडेपी, नरेन्द्र कोटनाला, बालव्यास दामोदर नौडियाल, पं महावीर पंत, अजय कोठारी,रवि जोशी, मोहित पंत, करन नेगी, रोशन भट्ट एवं बड़ी संख्या में सनातनी भक्त उपस्थित रहे।
