हरिद्वार ( रूपेश वालिया ) राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि किसी का स्थायी सूर्यास्त नहीं होता, लेकिन बार-बार अपने कद को साबित करना हर किसी के बस की बात नहीं। मदन कौशिक इस कला के सटीक उदाहरण बनकर उभरे हैं। साल 2002 में हरिद्वार नगर सीट से पहली बार विधायक बनने के बाद कौशिक का राजनीतिक सफर लगातार ऊंचाइयों की ओर बढ़ता गया। 2007 में रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज कर कैबिनेट मंत्री बने, 2012 में सत्ता से बाहर रहने के बावजूद संगठन में मजबूत पकड़ बनाए रखी और 2017 में फिर सरकार में मंत्री बनकर अपनी राजनीतिक पकड़ का लोहा मनवाया। साल 2002 में पहली बार विधायक बनने से शुरू हुआ उनका सफर लगातार ऊंचाइयों तक पहुंचता गया। 2007 में रिकॉर्ड वोटों से जीत और फिर कैबिनेट मंत्री बनना, 2012 में सत्ता से बाहर रहने के बावजूद संगठन में पकड़ बनाए रखना और 2017 में दोबारा सरकार में मंत्री बनना हर दौर में कौशिक ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। 2020 में उत्तराखंड की राजनीति में जब नेतृत्व परिवर्तन हुआ और पुष्कर सिंह धामी के हाथ में कमान आई तब भले ही कौशिक को मंत्री पद नहीं मिला, लेकिन उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने उनका कद बरकरार रखा। 2022 का चुनाव भी उनकी अगुवाई में लड़ा गया और भाजपा ने सत्ता में वापसी की। अब चार साल बाद हुए मंत्रिमंडल विस्तार में फिर से कैबिनेट मंत्री बनकर मदन कौशिक ने साबित कर दिया कि वे भाजपा के ट्रबलशूटर और पावर सेंटर दोनों हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कौशिक का खेल लंबा है और हर बार मजबूत वापसी उनकी पहचान बन चुकी है। उनके विरोधी उनके विषय में चाहे कुछ भी बातें करते हों या कैसी भी अनर्गल बयान बाजी करते रहे लेकिन मदन कौशिक भाजपा के कद्दावर नेता हैं, इससे कतई इंकार नहीं किया जा सकता।
