हरिद्वार, 10 मार्च। आगामी कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर मेला प्रशासन द्वारा कुंभ क्षेत्र के पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार का कार्य तेज कर दिया गया है। इसी क्रम में पौराणिक महत्व से जुड़े भीमगोडा कुंड के विकास और सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मंगलवार को अपर मेलाधिकारी दयानन्द सरस्वती ने तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के साथ भीमगोडा कुंड का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कुंड में पौराणिक जल स्रोत से जल आपूर्ति की व्यवस्था, जल निकासी प्रणाली, संरचनात्मक सुधार तथा सौंदर्यीकरण से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर स्थानीय पार्षद सुमित चौधरी और क्षेत्र के नागरिकों से भी संवाद कर उनके सुझाव लिए गए, ताकि विकास कार्य स्थानीय आस्था और परंपराओं के अनुरूप किए जा सकें। निरीक्षण दल में कुंभ मेला तकनीकी प्रकोष्ठ के अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार, सहायक अभियंता एस.के. तोमर सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। अपर मेलाधिकारी दयानन्द सरस्वती ने बताया कि भीमगोडा कुंड की पौराणिक पहचान और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए इसे अधिक आकर्षक और सुविधाजनक बनाया जाएगा। कुंड में स्वच्छ जल की निरंतर उपलब्धता के लिए प्राचीन जल स्रोत से जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, जबकि जल निकासी के लिए भी समुचित व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि कुंड के आसपास एक सुंदर पार्क विकसित किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच लगाई जाएंगी। साथ ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मजबूत रेलिंग, सुरक्षित मार्ग और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी की जाएगी। कुंभ मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को इस पौराणिक स्थल के दर्शन कराने और इसकी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से मेला प्रशासन द्वारा विशेष योजना के तहत यह कार्य कराया जा रहा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडवों के वनवास के दौरान भीम ने अपनी गदा या चरण प्रहार से यहां जल स्रोत प्रकट किया था, जिसके कारण यह स्थान भीमगोडा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। आज भी हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु इस पवित्र स्थल के दर्शन और जल स्पर्श को अत्यंत पुण्यकारी मानते हैं।
