हरिद्वार, 4 फरवरी। सन 1947 – 48 में कव्वाली हमलावर और पाकिस्तान की सेना की मदद से हिंदुस्तान के जम्मू कश्मीर की 78000 वर्ग किलोमीटर की भूमि पाकिस्तान के द्वारा नाजायज रूप से कब्जा कर ली गई थी और वह जमीन आज भी पाकिस्तान के पास में है और उस जमीन पर से पाकिस्तान का नाजायज कब्जा हटाने के लिए हरिद्वार के एडवोकेट अरुण भदौरिया और कमल भदोरिया एडवोकेट और चेतन भदोरिया LLB अध्यनरत ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति को पत्र भेज कर ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा है कि भारतीय संसद ने दिनांक 22 फरवरी सन 1994 को एक प्रस्ताव पारित किया था कि जम्मू कश्मीर का संपूर्ण क्षेत्र जो भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान ने अवैध कब्जे वाले भाग जो लगभग 78000 वर्ग किलोमीटर को अपने कब्जे में किया हुआ है को वापस लाने के लिए संसद में प्रस्ताव पारित किया गया था, यह प्रस्ताव केवल एक राजनीतिक घोषणा नहीं बल्कि भारत की संसद के द्वारा व्यक्त किया गया राष्ट्रीय संकल्प है जो प्रत्येक निर्वाचित सरकार के लिए संवैधानिक और नैतिक दायित्व भी उत्पन्न करता है ।आज हिंदुस्तान एक सशक्त राष्ट्र के रूप में जाना जाता है इसलिए यह अपेक्षा और भी प्रबल हो जाती है की 1994 के इस ऐतिहासिक सांसद प्रस्ताव को केवल अभिलेख तक ही ना रखा जाए बल्कि उसके अनुरूप ठोस कूटनीतिक और संवैधानिक व राजनीतिक कदम उठाते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान के द्वारा हिंदुस्तान की 78000 वर्ग किलोमीटर की भूमि को वापस हिंदुस्तान के अंदर लिए जाने हेतु कार्रवाई प्रारंभ कर देनी चाहिए क्योंकि सन 1947- 1948 वाला अब हिंदुस्तान नहीं है नया हिंदुस्तान है इसलिए 78000 वर्ग किलोमीटर की भूमि को लेने के लिए शीघ्र कार्रवाई हेतु प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को पत्र भेज कर मांग की गई है
