हरिद्वार, 8 फरवरी। कनखल थाना क्षेत्र के नूरपुर पंजनहेड़ी विवाद और गहराता नजर आ रहा है। हरिद्वार निवासी अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को एक प्रार्थना पत्र सौंपते हुए हल्का लेखपाल, हल्का तहसीलदार, उनके ड्राइवर एवं प्रशासन के अन्य कर्मचारियों के विरुद्ध मुकदमे में अभियुक्त बनाए जाने की मांग की है। अधिवक्ता का आरोप है कि इस मुकदमे में ब्रह्मचारी सुधानंद, जो एक निर्दोष व्यक्ति हैं, को दबाव बनाने की नीयत से फंसाया गया है।
प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया है कि ब्रह्मचारी सुधानंद का अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र प्रभारी जनपद न्यायाधीश हरिद्वार द्वारा 5 फरवरी को स्वीकार कर लिया गया था। इसके बावजूद उनका नाम मुकदमे में जोड़ा गया। अधिवक्ता ने बताया कि 27 जनवरी को हल्का पटवारी द्वारा ब्रह्मचारी सुधानंद को फोन कर 28 जनवरी को नूरपुर पंजनहेड़ी में अवैध निर्माण की जांच के लिए मौके पर बुलाया गया था। इसके अलावा हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा भी उन्हें लिखित आदेश जारी किया गया था।
28 जनवरी को जब ब्रह्मचारी सुधानंद मौके पर पहुंचे, तो वे वाहन से बाहर नहीं निकले। इसी दौरान दूसरे पक्ष द्वारा हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता अतुल चौहान पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया गया, जबकि उनके पास उच्च न्यायालय की सुरक्षा आदेश मौजूद थे। अधिवक्ता का कहना है कि ब्रह्मचारी सुधानंद ने न तो किसी अभियुक्त को शरण दी और न ही किसी प्रकार का षड्यंत्र किया। केवल मौके पर मौजूद होना अपराध नहीं हो सकता।
प्रार्थना पत्र में यह भी मांग की गई है कि यदि मौजूदगी को अपराध माना जा रहा है, तो मौके पर मौजूद हल्का लेखपाल, तहसीलदार, उनके ड्राइवर और अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों के विरुद्ध भी संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही इस पूरे घटनाक्रम के पीछे संभावित षड्यंत्र, फोन कर बुलाने के कारणों और पूर्व में मातृ सदन के संतों की हत्याओं से जुड़े संदर्भों की गहराई से जांच कराने की मांग एसएसपी हरिद्वार से की गई है।
