हरिद्वार, 24 मार्च। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ को कुंभ के रूप में प्रचारित किए जाने पर अपनी ही सरकार, मेला प्रशासन, गंगा सभा और संत समाज पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुंभ मेला ज्योतिषीय गणना के आधार पर निर्धारित होता है, ऐसे में अर्धकुंभ को पूर्ण कुंभ का दर्जा देना न तो परंपरा के अनुरूप है और न ही इसका कोई औचित्य है। त्रिपाठी ने कहा कि 2027 में केवल अर्धकुंभ का ही आयोजन होना है, इसलिए सरकार को इसे उसी रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक आयोजनों को जानबूझकर बड़े इवेंट के रूप में पेश कर पर्यटन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, जिससे हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों की मूल पहचान प्रभावित हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार हरिद्वार सहित अन्य धार्मिक स्थलों को पर्यटन स्थल में बदलने पर तुली हुई है, जो कि गंभीर चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, यदि तीर्थ स्थलों का स्वरूप पर्यटन केंद्रों जैसा हो गया, तो इसका सीधा असर तीर्थ पुरोहितों और संत समाज की परंपराओं पर पड़ेगा। अशोक त्रिपाठी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए इसे भी पर्यटन केंद्रित नीतियों का दुष्परिणाम बताया और मामले में शामिल वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही उन्होंने गंगा सभा और संत समाज की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख सामने आना चाहिए।
